स्वतंत्रता दिवस पर निदेशक संबोधन

         मैं भारत के 71 वें स्वतंत्रता दिवस पर आप सभी को बहुत-बहुत बधाई देता हु। इस बधाई के पात्र आज हम इसीलिए है क्योंकि स्वतंत्रता आंदोलन के सेनानियों नें अपने प्राणों का बलिदान दिया। हमें आज उनके बलिदान के प्रति न केवल ऋतज्ञता का भाव रखकर नमन करना चाहिए अपितु उनकी देशप्रेम की भावना को हमारे अंतस में जागृत रखना चाहिए। आज यह आजादी का जश्न और उत्सव मनाते हुए हमें विगत 70 वर्षों के विकास क्रम को भी देखना और उसका आकलन करना चाहिए। वैसे देखा जाएं तो मायूसी का कोई इलाज नहीं है। लेकिन जीवन बनता है आशा और उत्साह से। जीवन में हमारा विकास होता है हमारी सकारात्मक सोच से।  देखा जाएं तो 70 वर्ष व्यक्ति के जीवन की तुलना में राष्ट्र की दृष्टि से बहुत कम समय है। एक सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश होना इन 70 वर्षों की हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि का परिचायक है। कई देशों की तुलना में विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश होने के बावजूद अपने पक्ष और विपक्ष के विचारों और राजनीति मानस के साथ भी हम आगे है। हम यदि अपने 70 वर्षों के देखें और विश्व के सर्वशक्तिमान देशों को देखे और तुलना करें तो हमें दिखेगा कि जहां आज के सर्वशक्तिमान माने जाने वाले देश में दास व्यवस्था को समाप्त होने में 90 सालों से अधिक लगें, 70 साल की इस पूरी अवधि का आधा समय तो कई देशों के लिए आर्मी शासन में गुजर गया। इन सभी बिंदूओं को ध्यान में रखते हुए अगर हम देखें तो न हीं हमनें यह 70 साल किसी सामाजिक दासता में गुजारे और नहीं किसी अराजकता में। हमें गर्व होना चाहिए कि हमने अपने आजादी के 70 साल सबसे बड़े लोकतांत्रिक  देश के संविधान के साथ गुजारें। हमारे देश का यह संविधान इतना सशक्त है कि हम भिन्न-भिन्न भाषा बोलने वाले लोगों को एक सूत्र में पिरोता है , एक साथ जोड़ता है। राजनीतिक दृष्टि से देखें तो हमारे संविधान के तहत बनीं सरकारों ने समय-समय पर पक्ष और विपक्ष की भूमिका निभाई है। हमारी आपसी राजनीतिक वैचारिकी में भिन्नता के बावजूद हम इस देश को भाईचारे के साथ आगे लेकर आए है।इसलिए आज देश के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कहा कि 

                                                        ना गाली से ना गोली से

          देश बनता है भाईचारे से।"

 

हमारे देश नें इन 70 सालों में प्रौद्योगिकी, तकनीक के क्षेत्र में पूरे विश्व में अपना स्थान सुनिश्चित किया है। आपको याद होगा कि यदि आपको स्कूटर लेनी होती थी तो आपको 6 साल पहले इसकी बुकिंग करनी पड़ती थी और भुगतान आपको डॉलर में करना होता था। किंतु आज यह स्थिति नहीं है। भारत आज विनिर्माण (Manufacturing) के क्षेत्र में बहुत आगे निकल चुका है। कुछ सालों पहले जहां हमारा लक्ष्य आगे बढ़ना था वहीं आज विश्व में अग्रणी होना है। यह हमारे स्वावलंबन का द्योतक है। आज हमारी कार्यक्षमता और निपुणता नासा से अधिक है। हम अपने खुद के जीपीएस सिस्टम पर काम कर रहे है। 

आप सभी छात्र कल के भारत की नींव है। विश्व में भारत को अग्रणी स्थान पर पहुंचाने का दायित्व आपका हैं। इसी दायित्व हेतु बौद्धिक मनुष्यबल के निर्माण हेतु आईआईटी जैसे संस्थानों की शुरुवात हुई। आज इन संस्थानों में पढ़नेवाले कई ऐसे छात्र है जिनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। फिर भी वे अपनी लगन और जिद से आज यहा तक पहुंचे है। आज भी इनके माता-पिता अपना पेट काटकर अपने बच्चों को उच्च शिक्षा हेतु आईआईटी जैसे बड़े संस्थानों में पढ़ा रहे है। किंतु आपको यह भी जानना चाहिए कि  आपके माता-पिता की तरह यह देश भी आपके भविष्य को उज्वल भविष्य बनाने हेतु इन संस्थानों पर लाखों रुपये खर्च कर रहा है, यह इसलिए नहीं कि आप एक अभियंता बने अपितु इसलिए कि आप एक जिम्मेदार नागरिक बने और अपने कार्यक्षेत्र में लिडर के रुप में उभरें, फिर वह प्रौद्योगिकी/ तकनीक के क्षेत्र में हो या फिर किसी विश्वविद्यालय में। आपका दायित्व है कि आप उस संस्थान को आगे बढ़ाने में अपना भरसक योगदान दे और इस देश के प्रति अपने दायित्व की पूर्ति करें।  यह देश अपने राष्ट्रीय कोष से लाखों रुपये आपकी पढ़ाई पर खर्चा इसलिए नहीं कर रहा है कि आप पढ़कर विदेश जाकर नौकरी करें, बल्कि इसलिए कर रहा है कि आप एक भारतीय बनें। आज आप सभी के सामने चुनौती यह नहीं है कि आप 50 लाख के पैकेज पर माइक्रोसॉफ्ट में नौकरी पा लें, बल्कि भारत में अपना माइक्रोसॉफ्ट का निर्माण करना यह चुनौती हैं। और इसी उद्देश्य से यह देश आपसे उम्मीद लगाएं खड़ा है। एक बेहतर भविष्य की कामना करना अनुचित नहीं है किंतु एक देशवासी होने के नाते देश के प्रति अपने दायित्व के संबंध में जागरुक होना भी आवश्यक है। आज मुझे और आप सभी को यह सोचना चाहिए कि इस देश नें हमें सबकुछ दिया, हमने अपने भविष्य को सफल बनाया किंतु हमने अपने देश के लिए क्या किया। आज यह दिन न केवल उन हुतात्माओं के बलिदान को याद करने का है बल्कि भारत की इस युवा पीढी को उन बलिदानों से प्रेरित होकर आगे बढ़ने का है। क्योंकि स्वतंत्रता आंदोलन में भारी संख्या में विद्यार्थी थे जो आप की ही तरह पढ़ाई करते थे। आज जब कि हम स्वतंत्र है आज हमारे देश के बुद्धिजीवी वर्ग को बलिदान की आवश्यकता नहीं है, बल्कि आज हमें आवश्यकता है अपनी जिम्मेदारी और कर्तव्य को समझने की। अतः मैं आप सभी से अपील करना चाहता हू  कि इस आजादी का जश्न और उत्सव को मनाने के साथ-साथ हर व्यक्ति को देश के प्रति अपने जिम्मेदारी को सुनिश्चित करना चाहिए। अंत में मैं उन सभी स्वतंत्रता सेनानीयों को नमन करता हू और उनके बलिदान से आजाद हुए इस देश की स्वतंत्रता की अत्यंत विपरित परिस्थितियों में भी सुरक्षा करनेवाले हमारे देश की सेना के जवानों को भी इस स्वतंत्रता दिवस पर बधाई देता हु। 

 

जय हिंद