73वें स्वतंत्रता दिवस पर निदेशक का संदेश

       मैं भारत के 73वें स्वतंत्रता दिवस पर आप सभी संकाय सदस्यों, अधिकारियों, कर्मचारियों, प्रिय विद्यार्थियों, सुरक्षा कर्मियों तथा सभी भारतवासियों को बहुत-बहुत बधाई देता हु।

आज इस अवसर पर सबसे पहले हमें उन सभी को याद करना चाहिए जिनके बलिदान के कारण आज हम यह समारोह मना रहे है। यह वे लोग है जिन्होंने स्वं से परे सोचकर उस समय की भारत की गुलामी की जंजीरों से जकड़ी जनता को स्वतंत्रता का स्वप्न दिखाया। यह स्वप्न की पूर्ति में उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान दिया।

हमें इस अवसर पर शहिद-ए-आजम भगतसिंह, राजगुरु, रामप्रसाद बिस्मील के साथ साथ हमारी आजादी की लड़ाई के उन तमाम वीरों  का स्मरण करना चाहिए जो इस श्रृंखला के अमिट हस्ताक्षर है।

हमें शुक्रिया करना चाहिए उन भारतवीरों का जिन्होंने अपना पूरा जीवन अंदमान के जेल में अमानवीय व्यवहार को सहते हुए व्यतित किया। हमें कृतज्ञ होना चाहिए उन सभी शहिदों की शहीदी पर जिन्होनें ठिक 100 वर्ष पहले इसी पंजाब में जालियावाला बाग में अपने प्राणों को भारत माता पर निछावर किया। साथियों, इसी पंजाब की पावन धरती ने भगतसिंह, राजगुरु जैसे कई महान वीरों को जन्म दिया।

विगत 73 वर्ष हमारे लिए सरल नहीं थे, बल्कि बड़ी कठिनाईयों का यह दौर रहा है। किंतु हमने एकजुट होकर अपनी तमाम कठिनाईयों पर सफलतापूर्वक विजय पाई है। हमारे मन में यह प्रश्न आ सकता है कि स्वतंत्र भारत के 73 वर्ष पूर्ण करने पर भी हमारे देश में गरीबी है, आज भी हम महाशक्ति नहीं बना पाये है। लेकिन एक देश की दृष्टि से देखें तो हम यह पायेंगे कि 73 वर्ष का समय किसी भी देश के लिए बहुत छोटा समय है। जो राष्ट् आज अंतरराष्ट्रीय फलक पर महाशक्ति के रुप में दिखते है वे अपने यहा इस 73 वर्षों की अवधि में रंगभेद  को समाप्त नहीं कर पायें। हम सोच सकते है कि चायना जैसे देश ने कितनी प्रगति की है किंतु मित्रों तानाशाही के ध्वज तले हुआ विकास और गणतंत्र के ध्वज के तले हुए विकास में बहुत अंतर है। हमें यह समझना चाहिए कि हमारे विकास का मार्ग यह गणतंत्र के रास्ते से गुजरता है। जिसमें हर एक नागरिक के मत और मतांतर का सम्मान किया जाता है।

मित्रों, आज हमारे संस्थान के लिए भी एक महत्वपूर्ण दिन है। आज हमारे संस्थान में जो तिरंगा फहराया गया है वह इस आसपास के क्षेत्र का सबसे ऊंचा तिरंगा है। यह तिरंगा इस संस्थान के केवल राष्ट्रीय महत्व को प्रतिपादित नहीं करता अपितु इस संस्थान की आम जनमानस तक की पहुंच को दर्शाता है।

हमारे संस्थान का ध्वज ही ऊंचा नहीं है बल्कि विगत 4 वर्षों में हमने अपने संस्थान की शैक्षणिक और प्रशासनिक उपल्बधियों की ऊंचाई को भी छुआ है। जहां 4 वर्ष पूर्व हमारे यहा कुल 620 विद्यार्थी थे वहीं आज कुल 2004 विद्यार्थी है। 2016 तक जहां केवल 3 अभियांत्रिकी विभाग थे वहीं 2016 में हमने सिविल अभियांत्रिकी, 2017 में यांत्रिकी अभियांत्रिकी, 2018 में रासायनिक अभियांत्रिकी 2019 में गणित और कंप्यूटींग अभियांत्रिकी जैसे विभाग शुरु किए है। 2015 में जहां एक एम टेक कोर्स था वहीं आज 11 एम.टैक कोर्स चलाए जाते है। जहां 2015 में हमारी संकाय क्षमता 65 थी वहीं आज 164 संकाय सदस्यों के साथ सेवा दे रही है। इन सभी आंकड़ों से यह समझना गलत होगा कि हमने प्रतिवर्ष केवल संख्या में वृद्धि की अपितु  भा.प्रौ.सं. रोपड़ ने अपने कार्य, उपलब्धियों और सफलताओं में भी वृद्धि की है।

मुझे यह बताते हुए गर्व की अनुभूति हो रही है कि हमारे संस्थान को क्यूएस ब्रिक्स (QS BRICS) देशों की श्रेणी में 107 वां स्थान तथा क्यूएस इंडिया(QS INDIA Ranking) श्रेणी में 21 वां स्थान प्राप्त हुआ है। साथ ही हमें पूर्ण विश्वास है कि आगामी दि हायर एज्युकेशन रेंकिंग में भी अवश्य ही हम अपना स्थान सुनिश्चित करेंगे।

भारत की तमाम नई आईआईटी में से भा.प्रौ.सं.रोपड़ की दृष्टि, लक्ष्य एवं कार्यनीति भी  स्वयं को अन्य आईआईटी से भिन्न करती है। हमारे संस्थान का लक्ष्य तीन दृष्टियों को लेकर चलता हैः-

Ø  ज्ञान में योगदान

Ø  समाज में योगदान

Ø  राष्ट्र में योगदान

ज्ञान के क्षेत्र में आईआईटी का योगदान देखे तो आज भा.प्रौ.सं.रोप़ड़ शोध में सभी आईआईटी में अग्रणी है।

समाज में योगदान के संबंध में यदि हमारी भूमिका के संबंध में देखें तो आईआईटी रोपड़ केवल वैज्ञानिक शोध को ही बढ़ावा नहीं देता अपितु शोध के सामाजिक संदर्भ पर बल देते हुए जल-स्रोतों, कैंसर चिकित्सा, विनिर्माण के क्षेत्र में कार्य करता है। हमारे शोध का लक्ष्य आम जनमानस की आवश्यकताओं की पूर्ति एवं समस्या के समाधान पर केंद्रित है। इसी श्रृंखला में एमआईटी ने हमारे साथ एग्रीमेट किया है और आईआईटी रोपड़ में वॉटर रिसोर्स सेंटर बनने जा रहा है। आईआईटी रुड़की, आईआईटी मण्डी के साथ संयुक्त तत्वावधान में कैसर चिकित्सा शोध पर भी कार्य किया जा रहा है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने हमारी क्षमता और योग्यता को पुरस्कृत करते हुए विनिर्माण संसाधन केन्द्र (Manufacturing Resource Center) के रुप में हमारे संस्थान का चयन किया है।

मेरी दृष्टि में स्वतंत्रता और संस्थान का एक अभिन्न सहसंबंध है। स्वतंत्रता हमें विचारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करती है। हम अपना सुझाव रख सकते है। समय-समय पर हम व्यक्ति और संस्थान की आलोचना भी करते है। लेकिन मित्रों किसी भी व्यक्ति अथवा संस्थान की आलोचना करने के पूर्व पहले हर एक व्यक्ति को अपनी कर्तव्यपरायणता पर एक नजर डालनी चाहिए। आईआईटी के एक विद्यार्थी पर जितना पैसा खर्च होता है उसमें एक विद्यालय शुरु किया जा सकता है। किंतु यह राष्ट्र और समाज के उज्जवल भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक पूरे विद्यालय के खर्च के समान व्यय को एक आईआईटीयन बनाने पर खर्च किया जाता है। इस दृष्टि से आपकी जिम्नेदारी बहुत बढ़ जाती है। इसीलिए शिकायत और आलोचना करने के पहले यह जान लेना बहुत जरुरी है कि क्या आपने अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ निभाई है। इस संस्थान का प्रमुख होने के नाते समय आनेपर आप मेरी भी आलोचना करने हेतु स्वतंत्र है। मैं आपके आलोचना का स्वागत करता हू लेकिन मेरा बस यही आग्रह है कि आपकी आलोचना रचनात्मक होनी चाहिए।

मैं इस संस्थान का निदेशक होने के नाते आप सभी के सहयोग से इस संस्थान को न ही केवल राष्ट्रीय स्तर पर एक अग्रणी संस्थान बनाना चाहता हू और न ही केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर। मैं इस संस्थान को एक ऐसा संस्थान बनाना चाहता हू जो राष्ट्रीय महत्व की पूर्ति में प्रतिबद्ध इस देश को उत्थान और विकास के मार्ग पर ले जाने हेतु सहायक संस्थान के रुप में हो।

मुझे अपने इस स्वप्न की पूर्ति के संबध में कोई संदेह नहीं है क्योंकि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रोपड विभागों, छात्रों, शोध की बढ़ती संख्या को विकास का परिचायक न मानते हुए राष्ट्रीय महत्व की पूर्ति की दिशा में अपने कार्यों, उपलब्धियों और सफलताओं की कसौटी पर विकास को परिभाषित करता है।

मैं वह दिन बहुत ही समीप पाता हू जब हम आईआईटी इस ब्रांड के स्थान पर आईआईटी रोपड़ इस ब्रांड से अपना परिचय इस संसार को देंगे। यह दिन दूर नहीं है क्योंकि आईआईटी रोपड़ गुणवत्ता को न ही संख्या –बल के तराजू में तोलता है और न ही गुणवत्ता के साथ कोई समझौता करता है।

साथियों, कोई भी संस्थान न ही अपनी सुविधाओं से बड़ा बनाता है और न हीं अपने भवनों की भव्यता से। संस्थान बड़ा बनता है उस संस्थान के हर एक सदस्य की मेहनत और लगन से। अतः मेरी आप सभी से अपील है कि  इस स्वतंत्रता दिवस के उपल्क्ष्य पर हम सभी इस संस्थान और इस राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी को सुनिश्चित करें।

भारत माता की जय

जय हिंद