निदेशक महोदय का 74वें स्वतंत्रता दिवस पर संदेश

  मैं भारत के 74वें स्वतंत्रता दिवसपर आप सभी संकाय सदस्यों, अधिकारियों, कर्मचारियों, प्रिय विद्यार्थियों, सुरक्षा कर्मियों तथा सभी भारतवासियों को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। साथ ही मैं भा.प्रौ.सं. रोपड़ के उन सभी सदस्यों को भी बधाई देता हूँ जो आज इस समारोह में भाग नहीं ले पाएं।

आज हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हम आज का यह समारोह किन परिस्थितियों में मना रहे है। हम सभी को अपने कर्तव्यों का बार-बार स्मरण करना चाहिए। हमें उन स्वतंत्रता सेनानियों को भी स्मरण करना चाहिए जिन्होंने अपने जीवन का स्वर्णिम समय अंदमान की सेलुलर जेल में बिताया। आज उन्हीं वीरों की वीरता और शहीदी का यह प्रतिफल है की यह देश स्वतंत्र ही नहीं अपितु आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है।

हमारा देश वैश्विक पटल पर एक ऐसा देश है जो आत्मनिर्भर है, हमारा देश संकट और आपदा के समय एकजूटता का श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत करनेवाला देश है, हमारा देश जिसकी जाति मानवता है, हमारा देश जिसका धर्म संविधान है। मुझे यह कहते हुए जरा भी संकोच नहीं हो रहा है कि जिस भारत देश की कल्पना आजादी के महानायकों और वीरों ने की थी आज वह कल्पना साकार रुप ले रही है।

आज इस कोविद-19 की आपदा में हमने अपनी एकजूटता, बंधुत्व भाव और देश के प्रत्येक नागरिक के प्रति हमारे कर्तव्यों का अभूतपूर्व निर्वहन किया है। फरवरी के अंत में और मार्च के आरंभ में कई जानकारों ने यह आशंका जतायी थी कि मई आते आते भारत के करोड़ों लोग इस कोरोना वाइरस से संक्रमित हो जाएंगे और लाखों लोग मृत्यु को प्राप्त होंगे। एक ऐसा समय आएगा जब भारत के रास्तों पर शवों का कतारें देखी जाएगी। और यह सभी भविष्यवाणी इसीलिए हो रही थी क्योंकि तमाम विकसित देश हमारी स्वास्थ्य संबंधि संरचना को बहुत कमजोर समझ रहा था।

लेकिन मित्रों हम सभी भारतवासियों ने इस आशंका को वास्तविकता नहीं बनने दिया। हमें अपने दृढ निश्चय से इस संकट का बखूबी सामना किया है। यह संभव हुआ हमारे सरकार ने जो कड़े निर्णय लिए उनके कारण। भारत वह पहला देश है जिसने कोरोना वाइरस का जन्मस्थान चायना से आनेवाली सभी उड़ानों को रद्द किया। भारत वह पहला देश है जिसने उस समय लॉकडाउन की घोषणा की जिस समय हमारे यहां कोरोना के मामलें अन्य देशों की तुलना में बहुत ही कम थे।

हमारे सरकार द्वारा लिए गए इन कड़े निर्णयों का ही यह प्रतिफल है कि आज भी हमारे देश में संक्रमण का दर सबसे कम है, हमारे देश का मृत्यु का दर भी सबसे कम है । हमारे देश में कोरोना से संक्रमित लगभग 26 लाख लोगों में से 18 लाख लोग स्वस्थ्य हो चुके है, हमारा मृत्यु दर 2 प्रतिशत से भी नीचे है, हम अपने देश में ही मास्क का उत्पादन कर रहे है, हम अपने देश में ही वेंटिलेटर भी बना रहे है। हां, यह बात तो सच है कि एक भी व्यक्ति की मृत्यु हमारे लिए अत्यंत दुख का विषय है।लेकिन हमने जिस प्रकार से पिछले 5 से 6 महिनों में इस कोरोना आपदा को केन्द्र में रखते हुए हमारे स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए जो सफल प्रयास किया है वे हमारे प्रति विकसित देशों की धारणाओं का पूरजोर खंडन करती है।

मित्रों, सबसे महत्वपूर्ण बिंदू यह है कि इस विश्व में जितने भी देश इस कोरोना वाइरस से जूझ रहे है जो स्वयं को विकसित देश मानते है उन देशों में संक्रमितों के साथ किस तरह का व्यवहार हो रहा है यह सोचनीय विषय है। मेरे विचार में संक्रमित लोगों के प्रति हमारा व्यवहार ही हमारे विकसित होने और हमारे पिछड़े होने का प्रमाण है। भारत ने इस महामारी के समय जिस प्रकार की जागरुकता दिखाई, संक्रमण को रोकने के लिए जारी सभी निर्देशों का दृढ़ता पूर्वक पालन सुनिश्चित किया वह तो विकसित देशों में भी कम ही देखने को मिलता है। यही नहीं  हमारे यहां के संस्थानों ने कोरोना वैक्सीन के ट्रायल सफल होने के पहले ही इस वैक्सीन का उत्पादन शुरु कर दिया, यह बात हमारी दृढ़ता का परिचायक है। आज हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री महोदय ने भी लाल किले की प्राचीर से यह कहा कि आज हमारे पास इतना संसाधन है कि हम भारत के हर एक व्यक्ति तक इस वैक्सीन को पहुंचा सकते है और हम पहुचाएंगे।

मैं यहां पर इस बात को अवश्य साझा करना चाहूंगा कि 130 करोड़ की जनसंख्या वाले हमारे इस देश में हमने इस संक्रमण के बढ़ने की गति को जिस प्रकार से रोका है यह सभी हमारी पारदर्शी प्रणाली का परिणाम है। जिस प्रकार से हमारे देश में हर दिन संक्रमित लोगों की संख्या, इनमें से स्वस्थ्य होनेवाले लोगों की संख्या, संदिग्ध संक्रमितों की संख्या का आंकड़ा जारी किया जाता है वह प्रशंसनीय एवं सराहनीय है।

 आज इसका श्रेय हमारी केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों को भी जाता है जिन्होंने इस संक्रमण को बढ़ने से रोकने के लिए बड़े और कड़े कदम उठाएं। लेकिन हमें हमारे स्वास्थ्य कर्मचारियों , पुलिस कर्मियों, सफाई कर्मचारियों का शुक्रिया करना चाहिए जिन्होंने पिछले छह महिनों में दिन-रात एक कर इस देश की सेवा की हैं। हम अपने संस्थान में ही देखें तो जिस प्रकार हमारे संस्थान के सभी स्वास्थ्य कर्मियों ने, सुरक्षा कर्मियों ने और सफाई कर्मियों ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया है वह प्रशंसनीय और अतुलनीय है। आज भी यह संस्थान अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ सके इसलिए निर्माण कार्य से जुड़े लगभग 850 लोग अनवरत अपने दायित्व का निर्वहन कर रहे है।

इसमें जरा भी संदेह नहीं है कि भारत का हर एक नागरिक देश पर आए किसी भी संकट के समय अपने निजी मतों को त्याग कर हमारे राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा को बनाए रखना अपना परम कर्तव्य मानता है। यह ध्वज ही हम सभी को एक सूत्र में बांधे रखता है।

लेकिन मित्रों, भा.प्रौ.सं.रोपड़ का योगदान यहीं समाप्त नहीं होता। हमने कोविद-19 को केन्द्र में रखते हुए पिछले छह महिनों में 20 से 25 शोध किए है। मेरे लिए यह बड़े गर्व का विषय है कि हमारे संस्थान द्वारा किए जा रहे इन अनुसंधान कार्यों से जुड़े हमारे संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी तथा शोधार्थी अनुसंधान पर होने वाले व्यय की चिंता को लेकर मेरे पास नहीं आए अपितु वे बस इसलिए मेरे पास आए कि इन अनुसंधानों की सफलता हेतु आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था के लिए अनिवार्य यात्राओं हेतु जिला प्रशासन से अनुमति प्राप्त करने के लिए आएं। यह इन तमाम सदस्यों की संस्थान और देश के प्रति निष्ठा का ही प्रतिफल है कि हमारी 7 से 8 प्रौद्योगिकी के उत्पादन हेतु उद्योंगों के साथ चर्चा चल रही है। हमारे द्वारा विकसित यूव्ही सैनिटाइजर मशीन मुख्यमंत्री कार्यालय मोहाली और डीजीपी करनाल के यहा सफलतापूर्वक स्थापित की गई है। हमारे संस्थान द्वारा विकसित मेडी सारथी संक्रमित रोगियों को खाना और दवाईयां दिए जाने में उपयोग में लाया जा रहा है। हमारे द्वारा विकसित निगेटिव्ह प्रेशर ऐब्युलेंस भी कोरोना की इस लड़ाई में अपनी भूमिका निभा रहा है। हमारे यहां के रसायन विभाग में कोविद-19 के आरंभ काल में ही सैनिटाइजर बनाना शुरु कर दिया था। यह कहते हुए मुझे गर्व हो रहा है कि भा.प्रौ.सं. रोपड़ ने अपने अनुसंधान और अन्य पहलों से इस संकट को अवसर में परिवर्तित किया है।    

   लेकिन आज हमारा देश कई मोर्चों पर लड़ रहा है। एक ओर कोरोना है तो दूसरी और गलवान घाटी में चीन द्वारा क्रुरता से हमारे जवानों को मारे जाना है। हमें आज इस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर गलवान घाटी में शहिद हुए हमारे उन वीरों को भी नमन करना चाहिए । आज हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री महोदय ने लाल किले की प्राचीर से गलवान घाटी में शहिद हुए हमारे जवानों को याद करते हुए कहा कि हमारे देश के जवानों ने अपने पराक्रम से  एलओसी से एलएसी तक देश की संप्रभुता की रक्षा की है। मित्रों आज भारत 1962 का भारत नहीं है, यह भारत 2020 का भारत है। यह आज देश की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखने के लिए हर कसौटी पर अपने आप को सिद्ध कर सकता है। आज यहीं चीन भारत के साथ अच्छे संबंध स्थापित करने की बात करता है। इसमें जरा भी संदेह नहीं है कि हम वैश्विक पटल पर शांति के प्रतीक के रुप में है, किंतु आप शांति के प्रतीक तभी हो सकते है जब आप शक्तिशाली हो। क्योंकि कमजोर राष्ट्र कभी भी प्रतीक नहीं हो सकता।

मेरे विचार में हमें सब कुछ देश के जवानों पर नहीं छोड़ना चाहिए, यह ठिक भी नहीं है। एक जागरुक नागरिक होने के नाते इस देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा करना हमारा उतना ही दायित्व है जितना की सीमा पर तैनात हमारे वीर जवानों का है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत की आजादी के स्वतंत्रता सेनानियों ने केवल स्वतंत्र भारत का नहीं अपितु एक श्रेष्ठ भारत का स्वप्न देखा था।  हमने अपने दर्शन, अपनी विचारधारा और अपनी संस्कृति की डोर पकड़कर स्वतंत्र भारत से श्रेष्ठ भारत की यात्रा तय की है और अपनी सांस्कृतिक विचारधारा से विश्व को दूर तक प्रभावित किया है। इस माह में घोषित राष्ट्रीय शिक्षा नीति हमें इसी ओर बढ़ने की दिशा दिखाती है।

मैं आप सभी का ध्यान इस तथ्य की ओर भी आकृष्ट करना चाहता हू कि कोरोना महामारी के समय में जब देश के उपर आर्थिक रुप से बड़ा बोझ है उस समय भी कृषि और जल हेतु प्रौद्योगिकी के विकास के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार ने भा.प्रौ.सं. रोपड़ को 110 करोड़ की राशि स्वीकृत की है। एक ओर कोरोना महामारी और दूसरी ओर सीमा संघर्ष के बीच भी इस देश की सरकार अपने लक्ष्य का पीछा करते हुए अनुसंधान पर बल दे रही है तब एक राष्ट्रीय महत्व का संस्थान होने के नाते हमारा दायित्व ओर अधिक बढ़ जाता है। आई आई टी रोपड़ का दायित्व हैः

ज्ञान में योगदान

समाज में योगदान

राष्ट्र में योगदान

 हमें यह स्मरण रखना चाहिए कि आई.आई.टी. रोपड़ का लक्ष्य केवल उच्च रैकिंग प्राप्त करना नहीं है बल्कि अपने अनुसंधान और प्रौद्योगिकी से कृषि, जल, उद्योग, रक्षा आदि क्षेत्रों में एक अभूतपूर्व तकनीकी क्रांति लाना है। मैं यह चाहता हू कि आनेवाले समय में आई.आई.टी रोपड़ में विनिर्माण हब बनें, आई.आई.टी रोपड़ में इलेक्ट्रीक वेहिकल हब बने।

मुझे यह साझा करते हुए अत्यंत प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है कि हमने कोविद-19 के संकट को देखते हुए संस्थान के सुचारु संचालन को ध्यान में रखते हुए हमारी भविष्यिक रुपरेखा तैयार कर ली है। आई.आई.टी रोपड़ पिछला सेमेस्टर की समाप्ति करने के सबसे आगे रहा है और अगला सेमेस्टर कब शुरु किया जाएं इसकी रुपरेखा हम बना चुके हैं।

मित्रों, हम सभी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर यह प्रतिज्ञा लेते है कि हम हमारे पूरे सामर्थ्य से इस संस्थान को वैश्विक स्तर पर अग्रणी स्थान पर पहुंचाने हेतु भरसक प्रयास करेंगे और समाज, देश और देश के नागरिकों के प्रति हमारी जिम्मेदारी को सुनिश्चित करेंगे।  

भारत माता की जय

वन्दे मातरम्  

जय हिंद